अर्जित अवकाश के नियम एवं शासनादेश (EARNED LEAVE Rules)

अर्जित अवकाश के नियम एवं शासनादेश: इस आर्टिकल के माध्यम से आपको Earned leave in hindi से सम्बन्धित नियम एवं शासनादेश की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

5.1 अर्जित अवकाश तथा उसका नकदीकरण

राजकीय सेवकों हेतु अनुमन्य अर्जित अवकाश-नियम समय समय पर संशोधित होते रहे हैं। अर्जित अवकाश स्थायी और अस्थायी दोनों ही प्रकार के राज्य कर्मचारियों को देय होता है। स्थायी राज्य कर्मचारियों को मूल नियम 81-बी (1) तथा अस्थायी कर्मचारियों को सहायक नियम 157-ए (1) के अन्तर्गत अर्जित सेवा अवधि के आधार पर देय है। 1 जनवरी 1978 के पूर्व के नियमों के अधीन अर्जित अवकाश ड्यूटी पर व्यतीत की गई अवधि के 1/11 की दर से निकाला जाता था। किन्तु राजाज्ञा सं० सा०-4-1751/दस-201/76 दिनांक 24 जून 1978 के अधीन 1 जनवरी 1978 से प्रभावी नियमों के अन्तर्गत अर्जित अवकाश के आगणन की विधि सरल कर दी गई है। एक अन्य शासनादेश द्वारा अर्जित अवकाश जमा करने की अधिकतम सीमा भी 240 दिन से बढ़ाकर 300 दिन कर दी गई। अर्जित अवकाश एक कैलेण्डर वर्ष में 31 दिन का देय होता है।

मूल नियम 82-बी तथा सहायक नियम 143 के अनुसार वेकेशन विभाग के कर्मचारी जिन्होंने पूर्ण अवधि का वेकेशन (दीर्घावकाश) उपभोग किया हो, उनको अनुमन्य अवकाश अर्थात् 31 दिन में से 30 दिन कम कर दिए जायेंगे और उस स्थिति में कर्मचारी मात्र एक दिन का अवकाश अर्जित करेगा। यदि उसे सहायक नियम 145 तथा 146 के अन्तर्गत दीर्घावकाश को पूर्ण रूप से उपयोग करने से रोक दिया जाता है तो उसे पूरा अनुमन्य अर्जित अवकाश देय होगा। यदि वह आंशिक रूप से दीर्घावकाश उपभोग करने से वंचित कर दिया जाता है तो उसे 30 दिन के उसी अनुपात में अर्जित अवकाश देय होगा जितने दिन उसे कार्य पर बुलाया गया है।

मूल नियम 81 बी (1) सहायक नियम-157 ए (1) के अन्तर्गत सम्पूर्ण अवकाश काल भारत में व्यतीत करने की स्थिति में एक बार में अधिकतम 120 दिन का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है किन्तु यदि सम्पूर्ण त्रकाश काल भारत से बाहर व्यतीत किया जाय तो एक बार में अधिकतम 180 दिन का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है और यदि कुछ अवकाश एशिया में तथा कुछ भारत के बाहर व्यतीत किया जाय तो ऐसी स्थिति में भी अधिकतम 180 दिन का उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है किन्तु प्रतिबन्ध यह होगा कि भारत में व्यतीत किया गया अवकाश काल कुल मिलाकर 120 दिन अधिक न हो ।

अर्जित अवकाश काल में किसी कर्मचारी को उसी दर से अवकाश वेतन प्राप्त होगा जिस दर से वह अवकाश पर प्रस्थान करने से ठीक पूर्व वेतन प्राप्त कर रहा था। यदि अवकाश काल के मध्य किसी कर्मचारी को प्रत्यावर्तित किया जाता है तो ऐसी स्थिति में उसको प्रत्यावर्तन की तिथि से उस दर से अवकाश वेतन प्राप्त होगा जिस दर से वह कार्यरत रहने की स्थिति में प्रत्यारर्तित पद का वेतन प्राप्त करता ।

5.2 अर्जित अवकाश के आगणन का सरलीकरण

जैसा कि पहले कहा जा चुका है कि 1 जनवरी 1978 से पूर्व डयूटी पर व्यतीत की गई अवधि का 1/11 भाग अर्जित अवकाश देय होता था । उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने कार्यालय ज्ञाप सं सा0-4-1751/दस-201/76 लखनऊ दिनांक 24 जून 1978 द्वारा यह ज्ञापित किया कि 1 जनवरी 1978 से राज्य सेवकों के सम्बन्ध में अर्जित अवकाश के आगणन की विधि सरल कर दी है। दिनांक 21 दिसम्बर 1992 को जारी अधिसूचना सं० सा०-1-1071/दस-1992-201-76 द्वारा उत्तर प्रदेश फंडामेन्टल (प्रथम संशोधन नियमावली) ने भी इस विधि को 1-1-78 से प्रभावी घोषित किया। इस परिर्वतन के महत्वपूर्ण बिन्दु इस प्रकार है:

1- वर्ष के प्रारम्भ में 1 जनवरी को 16 दिन का और 1 जुलाई को 15 दिन का अर्जित अवकाश दो छमाही किस्तों में जमा किया जायेगा ।

2- पहली छमाही का शेष अर्जित अवकाश अगली छमाही अर्थात 1 जुलाई को अवकाश लेखे में जमा किया जाएगा । किन्तु उसकी अधिकतम सीमा 300 दिन से अधिक नहीं होगी ।

3- यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति 1 जनवरी 1978 था उसके पश्चात की जाती है तो उस छमाही में पूर्ण महीनों को आधार मानकर (जितने महीने उसने उस छमाही में सेवा की है) अर्जित अवकाश का आगणन किया जायेगा। मास के बीच में पड़ने वाली किसी तिथि को नियुक्त होने की दशा में उसके बाद के मास से आगणन किया जायगा। इस प्रकार किसी छमाही में पूर्ण महीनों पर 2% (ढाई) दिन प्रतिमाह की दर से अर्जित अवकाश देय होगा। उदाहरण के लिए यदि किसी की नियुक्ति 20 मार्च को हुई है तो उसके अर्जित अवकाश खाते में अप्रैल, मई, जून इन तीन महीनों के 2% गुने दिन अर्थात 7 दिन अर्जित देय होगा। पूर्णांक करने पर 8 दिन का अर्जित अवकाश उस छमाही में जमा होगा।

4- किसी छमाही में यदि सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत हो जाता है, त्यागपत्र दे देता है या मृत्यु हो जाने पर अथवा किसी अन्य कारण से सेवा में नही रहता है तो उस छमाही में शेष पूर्ण कैलेन्डर मास पर 24 दिन प्रतिमास की दर से उपार्जित अवकाश उसके अवकाश लेखे में जमा होगा।

5- असाधारण अवकाश यदि किसी कर्मचारी द्वारा लिया गया असाधारण अवकाश के कारण अर्जित अवकाश उसके जमा खाते से अधिक हो रहा हो तो अधिक के लिए अवकाश वेतन के सम्बन्ध में आवश्यक समायोजन कर लिया जाएगा।

6- पुराने नियम के अनुसार 31 दिसम्बर 1977 तक का अवशेष अर्जित अवकाश 1 जनवरी 1978 से नए अवकाश खाते में जमा होगा और एक दिन से कम वाले अंश को पूरा 1 दिन माना जाएगा ।

7- यदि कर्मचारी के अवकाश खाते में किसी छमाही के प्रथम दिन अर्जित अवकाश का योग 240 दिन से अधिक हो जाता है तो वह 300 दिन की अधिकतम सीमा तक मान्य होगा ।

8- असाधारण अवकाश की अवधि का 1/10 भाग (किन्तु 15 दिन से अधिक नहीं) अर्जित होगा। अर्जित अवकाश की गणना विधि का एक उदाहरण इस प्रकार है :-

आकस्मिक तथा विशेष आकस्मिक अवकाश! Casual and Special Casual Leave

मान लीजिए कोई कर्मचारी 5 जून से 6 जुलाई तक उपार्जित अवकाश लेता है अर्थात वह 31 दिन का उपार्जित अवकाश उपभोग करना चाहता है और उसके अवकाश लेखे में 225 दिन जमा है। इसका अवकाश लेखा निम्नलिखित विधि से अंकित किया जाएगा- 225 दिन

4 जून को देय कुल अवकाश
5 जून से 30 जून तक (पहली छमाही में उपभोग किया जाने वाला अवकाश)घटाएं (-) = 26 दिन
1 जुलाई को अवशेष अवकाश = 199 दिन
1 जुलाई को अर्जित अवकाश जो खाते में जमा हुआजोड़ें (+)= 15 दिन
1 जुलाई को देय कुल अर्जित अवकाश 214 दिन
1 जुलाई से 5 जुलाई तक उपभोग किया जाने वाला अवकाश घटाएंघटाएं (-) = 5 दिन
अवशेष अवकाश 209 दिन

अनुदेश

टिप्पणी

(1) देय अर्जित अवकाश को दिनों में व्यक्त किया जाना चाहिये।

(2) जब कोई सरकारी सेवक किसी विशिष्ट कैलेन्डर वर्ष के छमाही के दौरान नियुक्त किया जाय तब अर्जित अवकाश को उस कैलेन्डर वर्ष की छमाही में, जब वह नियुक्त किया जाये, सेवा के प्रत्येक पूर्णमास के लिए 2 दिन की दर पर जमा किया जाना चाहिये और एक दिन के भाग को निकटतम दिन पर पूर्णांकित किया जायेगा।

(3) विद्यमान सरकारी सेवक के सम्बन्ध में अर्जित अवकाश के पुराने अवकाश लेखे को बन्द कर दिया जायेगा और 31 दिसम्बर 1977 के अतिशेष को स्तम्भ 11 में नये लेखे में अग्रनीत किया जायेगा।

ऐसा करते समय 31 दिसम्बर 1977 को जमा अतिशेष को निकटतम दिन पर पूर्णांकित किया जायेगा।

(4) स्तम्भ 6 में प्रविष्टि पूर्ण दिनों में होनी चाहिए। एक दिन के भाग को निकटतम दिन पर पूर्णांकित किया जायेगा।

(5) असाधारण अवकाश की अवधि को लाल स्याही में अंकित किया जाना चाहिए।

प्रतिकर अवकाश ! COMPENSATORY LEAVE

5.3 अर्जित अवकाश की कुछ प्रकीर्ण व्यवस्थायें

(1) सरकारी कर्मचारी को अर्जित अवकाश पर वही वेतन देय होगा जो वह अवकाश जाने के पूर्व प्राप्त कर रहा था।

(2) किसी पद पर स्थानापत्र रूप से कार्य करने के बाद यदि वह अर्जित अवकाश ले लेता है और अवकाश समाप्ति पर वह मूल पद पर वापस आ जाता है तो उसे अपने मूल पद का वेतन ही देय होगा।

(3) अर्जित अवकाश किसी अन्य अवकाश के साथ जोड़ा जा सकता है। उदाहरण के लिये कर्मचारी द्वारा आवेदन करने पर चिकित्सावकाश के बाद अर्जित और अर्जित के बाद चिकित्सा अवकाश ले सकता है।

(4) उपर्युक्त सुविधा स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार के कर्मचारियों को उपलब्ध है।

(5) राजपत्रित अधिकारियों को 60 दिन तक यह अवकाश विभागाध्यक्ष स्वीकार करेगा। अराजपत्रित सरकारी सेवकों को अर्जित अवकाश वही अधिकारी स्वीकृत करेगा जिसे उस पद पर नियुक्ति करने का अधिकार हो।

Frequently Asked Question

1- क्या रविवार को अर्जित अवकाश में गिना जाता है?
Ans: रविवार को अर्जित अवकाश के रूप में गिना जाता है। कर्मचारियों को अर्जित अवकाश के रूप में रविवार और शनिवार मिलता है। आसन्न दिनों, यानी शनिवार, सोमवार और रविवार को छुट्टी लेने वाले कर्मचारियों को सैंडविच लीव्स माना जा सकता है।

2- अर्जित अवकाश कितने दिन पहले लगाना चाहिए?
Ans: अर्जित अवकाश, मातृत्व अवकाश और असाधारण अवकाश के लिए आवेदन, अवकाश अपेक्षित तिथि से कम से कम 15 दिन पूर्व प्रस्तुत किया जाएगा (मातृत्व अवकाश के मामले में, वह संभावित तिथि जिससे अवकाश अपेक्षित हो सकता है), बशर्ते कि स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी आवेदन विलम्ब से प्रस्तुत किए जाने पर भी अवकाश स्वीकृत कर सकता है।

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